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Sunday, July 20, 2014

कुंडलिया छन्द :



(१) कहाँ बदला है मौसम.............

पिसते  हरदम ही  रहे, मन में  पाले टीस
तुझको भी मौका मिला, तू भी ले अब पीस
तू भी ले अब पीस , बना कर  खा ले रोटी  
हम  चालों के बीच , सदा चौसर की गोटी
पूछ  रहा  विश्वास , कहाँ  बदला है मौसम
घुन  गेहूँ  के  साथ, रहा है  पिसते हरदम  ||

(२) दूर काफी है दिल्ली ........

बिल्ली है सम्मुख खड़ी , घंटी बाँधे कौन
एक अदद  इस प्रश्न पर , सारे चूहे मौन
सारे  चूहे  मौन , घंटियाँ  शंख  बजाते
मजबूरी  में  नित्य , आरती सारे  गाते
लिया सभी ने जान, दूर काफी है दिल्ली  
घंटी बाँधे कौन , खड़ी सम्मुख है बिल्ली  ||

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)