दस मार्च दिन शनिवार, ग्यारह बजे करीब
मोबाइल के कॉल पर संजय मिश्र हबीब.
बोले - “ भैया आपसे , है मिलने की आस
पहुँच गया हूँ दुर्ग में, ओव्हरब्रिज के पास.
लोकेशन बतलाइये , अपने घर की आप
ताकि पहुँचूँ शीघ्र मैं , जल्दी होय मिलाप.
संजय जी की बात सुन, आतुर हो गये नैन
मधुर मिलन की चाह में, हृदय-प्राण बैचैन.
लोकेशन बतलाई यूँ , ओव्हरब्रिज करें पार
मुड़कर सीधे हाथ फिर चलना करें आरम्भ
बीचोंबीच इस मार्ग पर, है विद्युत स्तम्भ.
यहीं प्रतीक्षारत खड़ा , मिल जाऊंगा भ्रात
संजय जी पहुँचे वहाँ, कुछ पल के उपरांत.
दूरभाष पर बातचीत , चेहरे से अनजान
इक दूजे को किंतु हम, तुरत गये पहचान.
संजय जी के साथ मैं, ज्योंहि पहुँचा द्वार
सपना , बिट्टू ने किया , मुस्काकर सत्कार.
फिर आपस में बैठकर जी भर के की बात
कैसे और कब से की,ब्लॉगिंग की शुरुवात.
ओबीओ के आयोजन , चर्चा मंच के रंग
किस ब्लॉगर से मेलजोल चैटिंग किसके संग.
कुछ चर्चा साहित्य पर,कुछ पारिवारिक बात
कुछ चर्चायें ब्लॉग पर , कुछ अपने हालात.
कार्य क्षेत्र , गतिविधियाँ , रोचक कई प्रसंग
छत्तीसगढ़ की संस्कृति , कविमित्र, सत्संग.
अच्छे रचनाकार कुछ, गीत गज़ल और छंद
दो घंटों के मिलन में, सदियों का आनंद.
ब्लॉग जगत में क्या नहीं नेह प्रेम सम्मान
रिश्तों में मीठास और चिट्ठों में है ज्ञान.
निर्मल निश्छल नेह की बंधी रहे यह डोर
प्रेम , प्यार , सद्भाव यूँ फैले चारों ओर.
मृदुभाषी विनम्र अति मोहक मुख मृदुहास
सेवा कुछ करने न दी, कहा –आज उपवास.
धनी प्रखर व्यक्तित्व के, संजय मिश्र हबीब
मुझसे मिलने आ गये , मेरे धन्य नसीब.
( माँ का स्वास्थ्य खराब होने के कारण 25 फरवरी से अवकाश पर दुर्ग में रहा. व्यस्तता व नेट अनुपलब्धता के कारण ब्लॉग जगत से दूर रहना पड़ा. इसी दौरान रायपुर से श्री संजय मिश्र हबीब आदित्य नगर दुर्ग आये. इसी अंतरंग मुलाकात को पद्य रूप में आप सभी के साथ शेयर करने का प्रयास किया है.)
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर, जबलपुर (म.प्र.)