अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ)
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Saturday, September 24, 2011

उपमेय बने उपमान –

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अल्हड़ लहरों में तेरी चंचलता देखी गंगाजल में तेरी ही पावनता देखी जो श्रद्धा तेरी पलकों में झाँकी मैंने हर मंदिर में श्रद्धा की निर्म...
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