अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ)
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Friday, July 22, 2011

इक बूँद तो छलक उठी होगी

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मन में इक कसक उठी होगी इक श्वाँस महक उठी होगी. इक पल को बहक उठी होगी कहीं कोयल चहक उठी होगी. चूड़ी जब खनक उठी होगी पैजनिया झनक उठी होगी. ...
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