अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ)
Wednesday, August 23, 2017

एक श्रृंगार गीत

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एक श्रृंगार गीत - कजरे गजरे झाँझर झूमर चूनर ने उकसाया था हार गले के टूट गए कुछ ऐसे अंक लगाया था । हरी चूड़ियाँ टूट गईं क्यों सुबह सुबह ...
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Thursday, July 13, 2017

दोहा छन्द

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दोहा छन्द नैसर्गिक दिखते नहीं, श्यामल कुन्तल मीत लुप्तप्राय हैं वेणियाँ, शुष्क हो गए गीत।। पैंजन चूड़ी बालियाँ, बिन कैसा श्रृंगार अलंक...
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Sunday, July 9, 2017

*रोला छन्द* - *गुरु पूर्णिमा की शुभकामनायें*

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*गुरु पूर्णिमा की शुभकामनायें* गुरु की महिमा जान, शरण में गुरु की जाओ जीवन  बड़ा  अमोल, इसे  मत  व्यर्थ गँवाओ दूर   करे   अज्ञान , वही ...
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Monday, July 3, 2017

गजल : खुशी बाँटने की कला चाहता हूँ

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गजल : खुशी    बाँटने की    कला    चाहता हूँ न पूछें मुझे आप  क्या  चाहता हूँ खुशी  बाँटने की  कला  चाहता हूँ | गज़ल यूँ लिखूँ लोग गम भू...
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Sunday, July 2, 2017

गजल

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शायद असर होने को है... माँगने हक़ चल पड़ा दिल दरबदर होने को है खार ओ अंगार में इसकी बसर होने को है | बात करता है गजब की ख़्वाब दि...
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Saturday, July 1, 2017

आप कितने बड़े हो गए हैं

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ग़ज़ल पर एक प्रयास - आप कितने बड़े हो गए हैं वाह चिकने घड़े हो गए हैं पाँव पड़ते नहीं हैं जमीं पे कहते फिरते, खड़े हो गए हैं दिल धड़...
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Sunday, May 21, 2017

अरुण दोहे -

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अरुण दोहे - पद के मद में चूर है, यारों उनका ब्रेन रिश्तों में भी कर रहे, डेकोरम मेन्टेन ।। साठ साल की उम्र तक, पद-मद देगा साथ बिन...
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