Thursday, May 14, 2015
चित्र एक , दोहे अनेक (भाग - २)
›
अब स्वभाव से हो रहा , हर मौसम प्रतिकूल बेटा तू बैसाख में , सावन झूला झूल || अपनी फेसब...
3 comments:
Thursday, May 7, 2015
चित्र एक-दोहे अनेक
›
सुख तेरे मन में छुपा , बाहर मत तू खोज । सुविधाओं को त्याग कर , खुशी मना हर रोज ।। अपनी फेसबुक में मैंने ...
5 comments:
‹
›
Home
View web version