अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ)
Tuesday, April 9, 2013

बाल-गीत

›
  अहा ! बालपन , बहुत निराला | सीधा – सादा , भोला - भाला || प्यास लगे तो “ मम-मम ” बोले भूख लगे चिल्लावे , रो ले मातु यशो...
19 comments:
Wednesday, March 27, 2013

तब फागुन ,फागुन लगता था

›
तब फागुन ,फागुन लगता था चौपाल  फाग   से  सजते  थे नित ढोल  - नंगाड़े बजते थे तब फागुन  , फागुन लगता था यह मौसम कितना चंचल थ...
8 comments:
Monday, March 25, 2013

रात रात भर चिट्ठी लिखना

›
छंद कुण्डलिया : चिट्ठी (1) बीते दिन वो सुनहरे  ,  नैन  ताकते द्वार कब आएगा डाकिया  , लेकर चिट्ठी- तार लेकर चिट्ठी -तार , डाक...
8 comments:
Thursday, March 21, 2013

आज विश्व कविता दिवस (वर्ड पोयट्री डे) : 21 मार्च पर

›
कविता  नहीं बनाई जा सके ,  कविता खुद बन जाय कागज पर उतरे नहीं , मन से मन तक जाय मन से मन तक जाय , वही कविता कहलाये अनायास  ...
15 comments:
Wednesday, March 20, 2013

जल है तो कल है....

›
(चित्र गूगल से साभार)   छंद मरहठा – 10 , 8 , 11 मात्राओं पर यति देकर कुल 29 मात्रायें | अंत में गुरु , लघु | जल मलिन न करिय...
16 comments:
Saturday, March 16, 2013

पाँच रंग

›
लाल रक्त   बहाता   आदमी       , करे   धरा को लाल | मृत्यु बाँटते फिर रहा,यह कलियुग का काल || नीला गौर वर्ण नीला   हुआ   ,...
18 comments:
‹
›
Home
View web version
Powered by Blogger.