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Saturday, December 8, 2012

कुण्डलिया :



पीले चाँवल द्वार.....

पंगत की रंगत गई  , गया प्रेम सत्कार
नयन तरसते देखने पीले चाँवल द्वार
पीले चाँवल द्वार  , हुआ कैसा परिवर्तन
मोबाइल से कभी,मेल से मिले निमंत्रण
हुये सभी रोबोट, मशीनों की कर संगत
गया प्रेम सत्कार , खो गई पत्तल पंगत ||

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर, जबलपुर (म.प्र.)

Friday, December 7, 2012

कुण्डलिया : प्रेम पात सब झर गये


पीपल अब सठिया गया,रहा रात भर खाँस
प्रेम पात सब झर गये , चढ़-चढ़ जावै साँस

 
चढ़- चढ़ जावै साँस , कहाँ वह हरियाली है
आँख  मोतियाबिंद , उसी की  अब लाली है


छाँह गहे अब कौन , नहीं रहि छाया शीतल
रहा रात भर खाँस, अब सठिया गया पीपल ||


 
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर , जबलपुर (म.प्र.)

Thursday, December 6, 2012

अक्स दिखाता आइना


कुण्डलिया :

अक्स दिखाता आइना , देता मन को ठेस
भ्रम के मायाजाल में, मिलते कष्ट कलेस

मिलते कष्ट कलेस,दुखों पर सुख के परदे
सुंदरता  का  मोह  नयन को अंधा कर दे

भटकाता  है  राह  , हमेशा रक्स दिखाता
देता मन को ठेस ,आइना अक्स दिखाता ||


अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर, जबलपुर (म.प्र.)