पीले चाँवल द्वार.....
पंगत की रंगत गई , गया प्रेम सत्कार
नयन तरसते देखने , पीले चाँवल द्वार
पीले चाँवल द्वार , हुआ कैसा परिवर्तन
मोबाइल से कभी,मेल से मिले निमंत्रण
हुये सभी रोबोट, मशीनों की कर संगत
गया प्रेम सत्कार , खो गई पत्तल पंगत ||
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर, जबलपुर (म.प्र.)